Thursday, September 11, 2008

पुखराज- येल्लो सफायर

पुखराज, ज्यूपिटर की दृष्टि कम लिए पहना जाता है । Sagittarius (धनु राशि) और pisces (मीन राशि) के महीनो में पैदा हुए लोगों को इस पीले पत्थर के पहने से आम तौर से ज्यादा फायदा होता है । माना जाता है की पुखराज पहनने वाले को मन की शान्ति, धन की प्राप्ति, अच्छी सेहत, अक्ल, लम्बी उम्र, नाम, शोहरत और सहनशीलता प्राप्त होती है ।

पुखराज की पहचान
कोरंदम नाम की प्रकार के पीले रंग के पत्थर को पुखराज या फिर येल्लो सफायर कहते हैं। क्योंकि इस सुनहरे रंग के पत्थर की कीमत आम पत्थरों के मुकाबले काफी ज्यादा होती है, इसी लिए चालाक व्यापारी बाज़ार में कई पीले पत्थरों को पुखराज के नाम से बेचने की कोशिश करते हैं। आम तौर पर इस पत्थर की सही पहचान करना काफ़ी कठिन है, परंतु यदि आप कुछ सरल उपाय लगाये तो कुछ हद तक कम से कम ग़लत पत्थर की पहचान तो कर ही सकते हैं।
  1. पुखराज का रंग पीला होता है । सबसे महंगा पुखराज सरसों के फूल की तरह गहरे पीले रंग का होता है। इसका रंग फीका तो हो सकता है और किसी और रंग में इसका नाम और दाम दोनों ही बदल जाते हैं । पीला रंग ही इसकी पहचान होती है इसी लिए पुखराज खरीदते समय गौर कीजिये इसके पीले रंग की ओर। यदि पीले रंग में नारंगी रंग की मिलावट हो, तो चलेगा परंतु अगर हरे रंग की मिलावट है, तो ये पत्थर पुखराज नही हो सकता. ज़्यादातर जितना गहरा रंग उतना गहरा उसका असर और उतना ही महंगा पत्थर।
  2. कोरंदम नाम की वरईटी के पत्थर जैसे मणि, नीलम, पुखराज, पादापराषा और अन्य सफायर नौ नंबर की सख्ती पर गिने जाते, क्योंकि पुखराज भी इसी परिवार का रत्न है, इसी लिए इस पर आसानी से खरोंचे और दरार नहीं पड़ती प्रत्येक दिन पहने जाने वाली पुखराज की जेवेलरी आसानी से ख़राब नही होनी चाहिए। पीले रंग के और पत्थर इससे ज्यादा जल्दी ख़राब हो जाते हैं।
  3. कुछ जौहरी पुखराज की पहचान पत्थर छूने से करते हैं. एक आम जैमौलोजिस्ट पुखराज की पहचान कुछ सरल उपाय से कर सकता है।
  4. पुखराज महंगा पत्थर होता है, तो सबसे पहले आप गौर कीजिये कि जौहरी आपको इसकी क्या कीमत बताता है। इसकी कीमत पर। अगर कीमत कुछ ज्यादा ही ख़ास है, तो और ध्यान दीजिये कि आप क्या खरीद रहे हैं।
पुखराज का रंग
जितना गहरा और चौकन्ना किसी भी रंगीन रत्न का रंग, उतना ही उसका मोल। गहरा नारंगी- पीला रंग पुखराज का सबसे अच्छा माना जाता है। परन्तु रंग आपका अपना शौक है और इसी बात पर निर्धारित होता है अच्छे और बुरे का अन्तर.
किसी भी पुखराज में ध्यान रखिये की उसका रंग पूरे में एकसार हो। यदि पुखराज का चूड़ी या हार इत्यादि है जिसमे कई पुखराज लगे हैं, तो सभी का रंग एकसार पीला होना चाहिए।
मार्केट में मिलने वाले कुछ पुखराज का रंग उपरी डाई से लगाया जाता है। ये रंग धुप और परफ्यूम से ढल सकता है और इसकी कीमत सच्चे पुखराज से कम होनी चाहिए।

पुखराज का वजन
ज्यादातार हर रत्न का भाव उसके वजन के साथ बढ़ने लगता है। पुखराज का कैरेट दाम भी उसके वजन के साथ बढ़ जाता है। साईज आपके सहूलियत, डिजायन, राशी और अपना शौक देख कर लेना चाहिए।

पुखराज का आकार
आकार एक ऐसा गुण है, जिसे कि आम तौर पर लोग नज़रंदाज़ कर देते हैं। अगर आप ओवल पुखराज खरीद रहे हैं, तो ध्यान दीजिये उसकी आकृति पर। हर तरफ़ सुमेल होनी चाहिये। ऐसा न हो कि एक तरफ़ चपटी हो और दूसरी तरफ़ उभरी हुई।
अगर पत्थर ज्यादा गहरा है, तो उसमे एक कालापन दिखेगा और यदी उथला है, तो रंग फीका लगने लगेगा । खरीदते समय ध्यान रखें की पत्थर कहीं से भी खंड न हो।

पत्थर की स्पष्टता
हर असली रत्न के अन्दर प्राकृतिक अंतर्वेशन होते ही हैं। बिना किसी दोष के प्राकृतिक रत्न बहुत असाधारण होते है और उनकी कीमत बोहुत ज्यादा हो जाती है। इसी कारण आप अपना पत्थर चुनने से पहले ये ध्यान कीजिये कि उसके अन्दर जितने कम दोष हों उतना अच्छा है परन्तु आपके आयव्ययक के अन्दर हो।
राशि के उपयुक्त, आपको वो रत्न चुनना चाहिए, जिसमें दोष, धुन्दलापन न होकर छोटी छोटी काले रंग की त्रुति हो जो अधिमान्यता से किनारे की तरफ हो। इस दोष से पत्थर के अन्दर से जाने वाली रौशनी में बाधा नही पढ़नी चाहिए।
गौर कीजिये की धुन्दला पुखराज खरीदने से बेहतर है फीके रंग का पत्थर खरीदना।

पुखराज की चमक
रत्न के ऊपर कोई उपरी खरोंच या चोट नही होनी चाहिए। सफ़ेद रौशनी में पत्थर को हल्का से हिला कर देख ली जिए की उसकी चमक कैसी है।

पुखराज का मोल
अब आते हैं सबसे ज़रूरी बात पर - पुखराज का दाम। किसी भी रत्ना का दाम लगाना वैसे तो आसान नहीं होता, मगर यदि आप उसके पैसे पर थोड़ा सा अनुसंधान करें तो आप बेहतर पुखराज पा सकते हैं उसी दाम में। इन्टरनेट पर गूगल कीजिये, ऑनलाइन दूकान पर जाइए और भिन्न जौहरी की दुकानों पर जाकर पुखराज के दाम का पता कीजिये।

एक और नज़र डालते हैं, पुखराज खरीदने के प्रयत्न पर:
  • कोई भी रत्न खरीदने से पहले कई दुकानों पर भेंट कीजिये और तुलना कीजिये आम पुखराज की एक दुसरे से उसके मोल को सही भांपने के लिए।
  • सबसे महंगा पुखराज मंगवाइये और उसमें गौर कीजिये रंग, दोष, आकृति और दाम पर। ये प्रयत्न करने से आपको समझ आ जाएगा कि अच्छे और ठीक ठाक में क्या अन्तर होता है।
  • यदि आपको पुखराज के बारे में पहले से जानकारी होगी, तो दुकानदार आपको ठगने की कोशिश नही करेगा
  • दुकानदार से स्पष्टता से पत्थर को वापस लेने की योजना के बारे में और उसकी उन्नति के बारे में। अदल बदल कि बात भी कीजिये।
  • जितना शिक्षित जौहरी, उतनी ही प्रायिक्ता की आपको सही रत्न मिलेगा। जौहरी ग्यानी होना चाहिए और अध्यापक भी।
  • नये जोहरी के पास जाने से मत कत्राइये उलटा उस्क्से ज्यादा जानकारी हासिल कीजिये। ऐसे जौहरी से मत खरीदिये, जिसके पास वापस जाने में हिचकिचाहट हो यदि आपको खरीदारी के दौरान पत्थर में कोई कमी लगे।
गहनों और आभूषण से सम्बंधित यदि आपके कोई प्रश्न, स्पष्टता, जिज्ञासा या चर्चा हो, तो ईमेल कीजिये surbhi.s.gupta@gmail.com पर।

सुरभि एक जानी हुई मणिकार हैं, जो जेवर अभिकल्पक के कार्य में ८ वर्ष से उप्पर से लगी हैं। सुरभि अमेरिका में रेडियो पर 'Jewelry with Surbhi' नाम का साप्ताहिक शो प्रस्तुत करती हैं। हीरों से ले कर, डिजाईन, सोने के खरीद, शादी के गहनों की परमर्श तक करती हैं। और जानकारी हासिल करने के लिए पढिये सुरभि के द्वारा लिखे गए लेख उनके ब्लॉग 'www.designdepot.blogspot.com' पर। संपर्क करें surbhi.s.gupta@gmail.com पर।
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